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तिथि

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तिथि: सूर्य की गति कम से कम ५७ कला ११ विकला और अधिक से अधिक गति ६१ कला ११ विकला है। तिथि याने सूर्य चंद्र के बीच का अंतर तिथि पूर्ण होने में कम से कम २० घंटा और ज्यादा से ज्यादा २७ घंटा होता है।तिथि के नाम : १) प्रतिपदा - प्रथमा २) द्वितीया - बीज ३) तृतीया - त्रीज ४) चतुर्थी - चौथ ५) पंचमी - पांचम ६) षष्ठी - छठ ६)सप्तमी - सप्तमी ७) अष्टमी - आठम ९) नोम १०)दशमी ११)एकादशी १२)द्वादशी १३) त्रयोदशी १४) चौदश १५) पूर्णिमा और ३०) अमावस्या

करण - पंचाग

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करण:  हर तिथि में २ करण होते है।यानी करण तिथि का आधा भाग हुआ। करण के नाम: ७ चर करण है और ४ स्थिर करण है। ७ चर करण १) बव २) बालव ३) कौलव ४)तैतिल ५) गर ६) वणीज ७) विष्टि (भद्रा) ४ स्थिर करण १) शकुनी २) चतुष्पाद ३)नाग ४)किस्तुघ्न विष्टि (भद्रा) करण हर माह में ८ तिथि के ऊपर आता है। हर दिवस पर विष्टि की दिशा नियत की हुई है। शुदि - भाग - दिशा ४ का द्वितीय भाग - पश्चिम ८ का प्रथम भाग - अग्नि कोण ११ का द्वितीय भाग - उत्तर दिशा १५ का प्रथम भाग - नैरुत्य दिशा वदी - भाग - दिशा ३ का द्वितीय भाग - ईशान कोण ७ का प्रथम भाग - दक्षिण दिशा १० का द्वितीय भाग - वायव्य दिशा १४ का प्रथम भाग - पूर्व दिशा   *भद्रा प्रवेश एवम निवृति के समय में विष्टि की दिशा में शुभ कार्य में वर्जित है। यदि विष्टि करण रविवार को हो तो पुण्यवती यदि विष्टि करण मंगलवार को हो तो भद्रा यदि विष्टि करण बुधवार को हो तो कल्याणी यदि विष्टि करण शनिवार को हो तो विष्टि कहते है। जब विष्टि करण के समय में चंद्र मेष,वृषभ,मिथुन,तथा वृश्चिक राशि में हो तो भद्रा देवलोक में होती है। सुख प्रदान करती है। जब विष...

yog

योग: सूर्य तथा चंद्र जिस राशि में हो उसका योग करके जो राश्यादि मिले उसे १३ अंश २० कला से भाग देने पर शेष मिले वह "योग " मिलता है। योग कम से कम २० घंटा और ज्यादा से ज्यादा २५ घंटा का बनता है। २७ योग है।जिसमे जन्म समय का योग का फल का विवरण निम्न है। (१) विष्कुंभ :  स्त्री, पुरुष और मित्रों से प्रसन्न होता है, सभी कार्यों         में स्वतंत्रता का आनंद लेता है, शरीर को साफ रखता है,।             सुंदर शरीर रखता है।  (२) प्रीति : बोलने में चतुर, सुन्दर, धनवान, बडा, उदार, सुखी,                विनोदी, धार्मिक है।   (३) आयुष्यमान : धनवान, शीघ्र साहसी, अनेक स्थानों और वनों            में  गुमनार, आदरणीय, दीर्घायु, मानी।   (४) सौभाग्य : ज्ञानी, बलवान, सत्य उपासक, विवेकी, अच्छे               प्रतिष्ठित लोगों द्वारा स्तुति प्राप्त, सौभाग्य,अभिमानी होता है। (५) शोभन : शीघ्र चतुराई से प्रतिक्रिया...

अधिकमास निर्णय

सूर्य को एक राशि पूर्ण करने के लिए 30. 44 दिन लगते हैं ।अतः सौरवर्ष 365. 24 दिन में खत्म होता है जबकि चंद्र को 12 राशि पूर्ण करने के लिए 354. 32 दिन होते हैं इस तरह सौर वर्ष और चांद्र वर्ष के अंदर 10.17 दिवस का फर्क पड़ता है जो 3 साल में एक महीना यानी 30 दिन हो जाते हैं हमारे ऋषि-मुनियों ने यह समानता दूर करने के लिए अधिक मास का निर्माण किया है । अब अधिक मास का निर्णय कैसे लें ?? जो महीने में सूर्य की संक्रांति ना हो वह महीना अधिक महीना होता है । इस वर्ष 18 सितंबर से लेकर 16 अक्टूबर अधिक मास है। धार्मिक बताएं तो कहा जाता है कि 12 मास के 12 देवताओं अधिपति हो गए थे जबकि अधिक मास का कोई देवता अधिपति नहीं हुआ था तो अधिक मास के कहने पर भगवान विष्णु ने उसका अधिपत्य लिया था। इसीलिए इसको पुरुषोत्तम मास कहते हैं। प्राचीन कथा हिरण्यकशिपु का वरदान था कि 12 मास के अंदर कोई उसको मार नहीं सकेगा इसीलिए अधिक मास में भगवान विष्णु ने नृसिंह स्वरूप लेकर हिरण्यकशिपु का नाश किया था। अधिक मास में 17 सितंबर और 13 अक्टूबर  एकादशी होती है जिसका धार्मिक बहुत महत्व है। इसके अलावा अधिक मास में 10 अक्टूबर और 11...

लग्नेश ग्रह के फल

लग्नेश यदि चंद्र होता है तो उसकी असर आकृति पोषण और निभाओ करने में लगती है संसार में ग्रुप प्रेम की प्रकृति मजबूत होती है जातक का चित्र कुटुंब और मां-बाप के प्रति अधिक रहता है कल्पना शक्ति अधिक होने के कारण एवं लावणी सेल होने के कारण और मन निरंतर निर्भर होने के कारण उनका स्वभाव विचारों में स्थिरता नहीं लाता। जातक में शक्ति और खंड की कमी दिखाई देती है वह अनुभव और कार्य करवा करने की बुद्धि वाले संसारी जिंदगी वाली व्यवसाय शास्त्र और हुनर के लायक होते हैं यह सावत समझो और थोड़े से कंजूस होते हैं हर चीज में दिव्य दृष्टि वाले होते होते हैं। जातक अपनी लावणी की भावना को कंट्रोल रखें तो यह अनुभवी और शक्तिशाली होते हैं।  लग्नेश बुध कन्या और मिथुन राशि का स्वामी बुध होता है। यदि लग्नेश बुध होने पर उसकी असर मगज एवं ज्ञान तंतु पर अधिक दिखाई देती है इंद्रियां से ज्यादा मन का संबंध आगरा शारीरिक मानसिक शक्ति स्मरण शक्ति बुद्धि कंफर्टनेस युक्ति इत्यादि पर ज्यादा दिखाई देती है जातक वक्ता विवादी विचारशील और बातचीत में कुशल होते हैं यह गुप्ता से भरे हुए कार्य करने के लिए होते हैं इनकी समग्र प्रकृति कदाच...

ग्रह की दस अवस्था क्या है? निर्णय कैसे करे?

अवस्था के बारे में बात करेंगे ग्रहों की 10 अवस्था होती है और भाव का अधिपति 10 अवस्थाओं में से जो अवस्था में है उसका पहला बल का निर्णय होता है वह 10 अवस्था कौन सी है 1. दीप्त अवस्था: जो ग्रह अपनी उच्च राशि में या मूल त्रिकोण राशि में या खुद की राशि में होता है तब वह ग्रह दीप्त अवस्था में होता है । दीप्त अवस्था में स्थित ग्रह की दशा में जातक अपने प्रताप से प्रचंड खुद के शत्रुओं का नाश करता है, लक्ष्मी होती है। 2.स्वस्थ अवस्था: स्वस्थ अवस्था जोक रहा अपनी उच्च राशि में होता है । स्वस्थ ग्रह की दशा में जातक को रत्न प्राप्ति सुख प्राप्ति सुवर्ण रत्ना आदि की प्राप्ति होती है उच्च पद एवं ग्रुप कुटुंब की वृद्धि होती है 3. मुदित अवस्था जब ग्रहों अपने मित्र राशि में हो तो मुदित अवस्था होता है मुदित अवस्था में स्थित ग्रहों की दशा में जातक हर्ष पूर्ण, स्वर्णा दी रत्नों से परिपूर्ण, शत्रु का नाश करने वाला, समस्त सुखों का भुगतान होता है 4. शांत अवस्था जो ग्रह चंद्र से युक्त होता है वह शांत अवस्था में होता है शांत ग्रह की दशा में जातक शांत चित्र वाला सुख और धन युक्त, राजा का मंत्री, परोप...

मेष लग्न

मेष लग्न वाले मनुष्य मध्यम कद के मुख और गर्दन लंबी होती है बॉडी पार्ट्स मजबूत होते हैं आंखें ब्लैक और तीव्र दृष्टि होती है स्वभाव से यह भोले सीधे मुंह पर बोलने वाले सुशील हिम्मतवार साहसिक उदार स्वतंत्र लड़ा यक थोड़े इंसानों और छोटी बातों पर तकरारी रामानी होते हैं सत्ता पर नौकरी करने वाले होते हैं उद्यमी होते हैं बुद्धि सारी और चंचल होते हैं मानसिक उम्र में उनकी थोड़ी सी कमी होती है और रीति रिवाज में फेरफार करने वाले होते हैं विश्वासों और दयालु होते हैं। बार-बार अपने रहता या रेसिडेंस को चेंज करने वाले होते हैं मशीनरी एजेंट और 27 की पदवी पर काम करते हैं और देश गमन ज्यादा करते हैं इनकी यहां संतान कम संख्या में होते हैं इनको वोमिटिंग पेट के लगती और आंख की और पक्की सामान्य पीड़ा रहती है प्राप्त उच्च स्थिति में से यह गिरते हैं यानी अपने जीवन के अंदर बार-बार अपडाउन आता रहता है वियोग के प्रसंग में इस पर रहते हैं मित्रों की मदद से यह बहुत अधिक प्रोग्रेस करते हैं खेती और लगने के बाद ज्यादा लाभ होता है पैसा और मिल्कत के संबंधित कोर्ट केस और तकरार इनके लाइफ में होती है जिसमें स्त्रियों का अधिक भाग...