अधिकमास निर्णय

सूर्य को एक राशि पूर्ण करने के लिए 30. 44 दिन लगते हैं ।अतः सौरवर्ष 365. 24 दिन में खत्म होता है जबकि चंद्र को 12 राशि पूर्ण करने के लिए 354. 32 दिन होते हैं इस तरह सौर वर्ष और चांद्र वर्ष के अंदर 10.17 दिवस का फर्क पड़ता है जो 3 साल में एक महीना यानी 30 दिन हो जाते हैं हमारे ऋषि-मुनियों ने यह समानता दूर करने के लिए अधिक मास का निर्माण किया है ।
अब अधिक मास का निर्णय कैसे लें ??
जो महीने में सूर्य की संक्रांति ना हो वह महीना अधिक महीना होता है ।
इस वर्ष 18 सितंबर से लेकर 16 अक्टूबर अधिक मास है।
धार्मिक बताएं तो कहा जाता है कि 12 मास के 12 देवताओं अधिपति हो गए थे जबकि अधिक मास का कोई देवता अधिपति नहीं हुआ था तो अधिक मास के कहने पर भगवान विष्णु ने उसका अधिपत्य लिया था। इसीलिए इसको पुरुषोत्तम मास कहते हैं। प्राचीन कथा हिरण्यकशिपु का वरदान था कि 12 मास के अंदर कोई उसको मार नहीं सकेगा इसीलिए अधिक मास में भगवान विष्णु ने नृसिंह स्वरूप लेकर हिरण्यकशिपु का नाश किया था।
अधिक मास में 17 सितंबर और 13 अक्टूबर  एकादशी होती है जिसका धार्मिक बहुत महत्व है। इसके अलावा अधिक मास में 10 अक्टूबर और 11 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र ,9 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, 2 दिन द्विपुष्कर योग और एक दिन अमृत सिद्धि योग होते हैं। जो शुभ कहे जाते हैं ।
अधिक मास क्या करें???
अधिक मास में विष्णु की उपासना विष्णु भगवान की उपासना करना शुभ मानते हैं ।अधिक मास में किया हुआ मंत्र जाप दान सौ गुना फल देता है। अधिक मास में वस्त्र दान धन्य दान और दीपदान का बहुत महत्व है। दीपदान तेल या घी का दिया बनाकर नदी में,किनारे, मंदिर में या चार रस्ते पर दान करने का बहुत महत्व है। दीपदान करने से अकाल मृत्यु नहीं होती है। अधिक मास की शुभ तिथि के अंदर मालपुआ (जैसी मिठाई यानी जिस मिठाई में छिद्र हो और अधिक रस वाली हो) उस तरह की मिठाई यानी मालपुआ को दो कासाकी पात्र के बीच में रखकर लाल वस्त्र लपेटकर, मालपुआ में अंदर गुप्त धन सुवर्णा या कुछ दान रखकर ब्राह्मण को दान करने से  हमारे भाग्य की भाग्योदय होता है।जीवन में अनिष्ठ दूर होते है।


व्यापार वृद्धि के लिए चने की दाल और सूखा मेवा यानी ड्राई फुट का दान कर शक्ते है।  गुड़ का दान करने से संबंधों में मिठास आती है। रोग और कर्ज की निवृत्ति के लिए ओम नमो भगवते वासुदेवाय का मंत्र जाप करना शुभ है ।घर के नैरूत्यकोण में चंपा का फूल रखकर ओम नमो भगवते वासुदेवाय का मंत्र बोलने से पितृ दोष और राहु दोष कम होते हैं ।पीपल का पूजन करना भी शुभ है ।
इसके अलावा धार्मिक ग्रंथ जैसे कि श्रीमद्भागवत, रामायण ,हरिवंश पुराण, विष्णु पुराण इत्यादि का पठन-पाठन करना या करना या कथा सुनना शुभ है। श्रीमद्भागवत का दान करना भी बहुत महत्वपूर्ण है जिससे विद्या की एवं तेज की वृद्धि होती है। 
क्या ना किया जाए ???अधिक मास में क्या न करें अधिक मास के अंदर सांसारिक मांगलिक कार्य जैसे के विवाह ,मुंडन, तिलक ,प्राण प्रतिष्ठा इत्यादि चीजों की धार्मिक कार्य करना मना है। 
अधिक मास में किया हुआ मंत्र जाप और दान सौ गुना फलदायक होता है। इसमें उपासना एवं तुलसी का एक पत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय
यह मंत्र बोलकर भगवान विष्णु पर चढ़ाना शुभ रहता है जिसके कारण धन की वृद्धि होती है।































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