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Showing posts from February, 2021

अधिकमास निर्णय

सूर्य को एक राशि पूर्ण करने के लिए 30. 44 दिन लगते हैं ।अतः सौरवर्ष 365. 24 दिन में खत्म होता है जबकि चंद्र को 12 राशि पूर्ण करने के लिए 354. 32 दिन होते हैं इस तरह सौर वर्ष और चांद्र वर्ष के अंदर 10.17 दिवस का फर्क पड़ता है जो 3 साल में एक महीना यानी 30 दिन हो जाते हैं हमारे ऋषि-मुनियों ने यह समानता दूर करने के लिए अधिक मास का निर्माण किया है । अब अधिक मास का निर्णय कैसे लें ?? जो महीने में सूर्य की संक्रांति ना हो वह महीना अधिक महीना होता है । इस वर्ष 18 सितंबर से लेकर 16 अक्टूबर अधिक मास है। धार्मिक बताएं तो कहा जाता है कि 12 मास के 12 देवताओं अधिपति हो गए थे जबकि अधिक मास का कोई देवता अधिपति नहीं हुआ था तो अधिक मास के कहने पर भगवान विष्णु ने उसका अधिपत्य लिया था। इसीलिए इसको पुरुषोत्तम मास कहते हैं। प्राचीन कथा हिरण्यकशिपु का वरदान था कि 12 मास के अंदर कोई उसको मार नहीं सकेगा इसीलिए अधिक मास में भगवान विष्णु ने नृसिंह स्वरूप लेकर हिरण्यकशिपु का नाश किया था। अधिक मास में 17 सितंबर और 13 अक्टूबर  एकादशी होती है जिसका धार्मिक बहुत महत्व है। इसके अलावा अधिक मास में 10 अक्टूबर और 11...

लग्नेश ग्रह के फल

लग्नेश यदि चंद्र होता है तो उसकी असर आकृति पोषण और निभाओ करने में लगती है संसार में ग्रुप प्रेम की प्रकृति मजबूत होती है जातक का चित्र कुटुंब और मां-बाप के प्रति अधिक रहता है कल्पना शक्ति अधिक होने के कारण एवं लावणी सेल होने के कारण और मन निरंतर निर्भर होने के कारण उनका स्वभाव विचारों में स्थिरता नहीं लाता। जातक में शक्ति और खंड की कमी दिखाई देती है वह अनुभव और कार्य करवा करने की बुद्धि वाले संसारी जिंदगी वाली व्यवसाय शास्त्र और हुनर के लायक होते हैं यह सावत समझो और थोड़े से कंजूस होते हैं हर चीज में दिव्य दृष्टि वाले होते होते हैं। जातक अपनी लावणी की भावना को कंट्रोल रखें तो यह अनुभवी और शक्तिशाली होते हैं।  लग्नेश बुध कन्या और मिथुन राशि का स्वामी बुध होता है। यदि लग्नेश बुध होने पर उसकी असर मगज एवं ज्ञान तंतु पर अधिक दिखाई देती है इंद्रियां से ज्यादा मन का संबंध आगरा शारीरिक मानसिक शक्ति स्मरण शक्ति बुद्धि कंफर्टनेस युक्ति इत्यादि पर ज्यादा दिखाई देती है जातक वक्ता विवादी विचारशील और बातचीत में कुशल होते हैं यह गुप्ता से भरे हुए कार्य करने के लिए होते हैं इनकी समग्र प्रकृति कदाच...

ग्रह की दस अवस्था क्या है? निर्णय कैसे करे?

अवस्था के बारे में बात करेंगे ग्रहों की 10 अवस्था होती है और भाव का अधिपति 10 अवस्थाओं में से जो अवस्था में है उसका पहला बल का निर्णय होता है वह 10 अवस्था कौन सी है 1. दीप्त अवस्था: जो ग्रह अपनी उच्च राशि में या मूल त्रिकोण राशि में या खुद की राशि में होता है तब वह ग्रह दीप्त अवस्था में होता है । दीप्त अवस्था में स्थित ग्रह की दशा में जातक अपने प्रताप से प्रचंड खुद के शत्रुओं का नाश करता है, लक्ष्मी होती है। 2.स्वस्थ अवस्था: स्वस्थ अवस्था जोक रहा अपनी उच्च राशि में होता है । स्वस्थ ग्रह की दशा में जातक को रत्न प्राप्ति सुख प्राप्ति सुवर्ण रत्ना आदि की प्राप्ति होती है उच्च पद एवं ग्रुप कुटुंब की वृद्धि होती है 3. मुदित अवस्था जब ग्रहों अपने मित्र राशि में हो तो मुदित अवस्था होता है मुदित अवस्था में स्थित ग्रहों की दशा में जातक हर्ष पूर्ण, स्वर्णा दी रत्नों से परिपूर्ण, शत्रु का नाश करने वाला, समस्त सुखों का भुगतान होता है 4. शांत अवस्था जो ग्रह चंद्र से युक्त होता है वह शांत अवस्था में होता है शांत ग्रह की दशा में जातक शांत चित्र वाला सुख और धन युक्त, राजा का मंत्री, परोप...